10 रुपये की चिकन बिरयानी | The ₹10 Biryani: महंगा पड़ा धोखा
राजा प्रताप सिंह के दो बेटों में से छोटे बेटे भान सिंह को उसकी योग्यता और प्रजा के प्रति प्रेम के कारण राजगद्दी मिलती है। बड़ा बेटा मुकुल सिंह बाहर से भाई को बधाई देता है, लेकिन उसके मन में गहरी जलन और बदले की आग भड़क उठती है।
कुछ समय बाद राज्य में सिर्फ 10 रुपये में बेहद स्वादिष्ट चिकन बिरयानी बेचने वाला राजू सामने आता है। बिरयानी का स्वाद राजा भान सिंह को इतना पसंद आता है कि वह राजू को महल का मुख्य रसोइया बना देता है। लेकिन राजा को नहीं पता था कि सस्ती बिरयानी के पीछे एक खतरनाक साजिश छिपी हुई है।
जब राजा अपने ही रसोइए के सामने राज्य की सैन्य कमजोरी बता देता है, तो दुश्मन को महत्वपूर्ण जानकारी मिल जाती है। इसके बाद बिरयानी, जहर की साजिश और सत्ता की लालच से जुड़ी घटनाएं पूरे राज्य का भविष्य बदल देती हैं।
कहानी एक ऐसे राज्य से शुरू होती है, जहां राजा प्रताप सिंह बूढ़े हो चुके थे और अब वह अपनी राजगद्दी अपने दो बेटों में से किसी एक को सौंपना चाहते थे। प्रजा दोनों राजकुमारों को अच्छी तरह जानती थी।
बड़ा बेटा मुकुल सिंह गैर-जिम्मेदार और नैतिक रूप से कमजोर माना जाता था, जबकि छोटा बेटा भान सिंह एक कुशल योद्धा था और अपनी प्रजा से बहुत प्रेम करता था।
जब राजगद्दी के उत्तराधिकारी की घोषणा का दिन आया, तो महल के सामने बड़ी भीड़ जमा हो गई। राजा प्रताप सिंह ने साफ कहा कि उनका फैसला किसी बेटे के प्रति अंधे प्रेम पर नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य और प्रजा की भलाई पर आधारित है।
इसके बाद उन्होंने छोटे बेटे भान सिंह को राज्य का नया राजा घोषित किया और उसके सिर पर राजमुकुट रख दिया। पूरी प्रजा खुशी से झूम उठी।
भान सिंह को भाई की ओर से बधाई देते हुए मुकुल सिंह के चेहरे पर झूठी मुस्कान थी। उसके मन में अपने पिता के फैसले को लेकर गहरी जलन पैदा हो चुकी थी। वह चुपचाप वहां से चला गया, लेकिन उसके मन में सत्ता हासिल करने की योजना बनने लगी।
उधर भान सिंह ने राजा बनने की खुशी में अपनी पसंदीदा डिश चिकन बिरयानी पूरे राज्य में बांटने का आदेश दिया। समय बीतने के साथ उसने खुद को एक अच्छा और जिम्मेदार शासक साबित किया। वह राज्य की सैन्य सुरक्षा मजबूत करना चाहता था और अपने कर्तव्यों को गंभीरता से निभाता था।
भान सिंह की एक खास आदत थी। उसे चिकन बिरयानी बहुत पसंद थी और वह हमेशा ऐसी बिरयानी की तलाश में रहता था, जिसका स्वाद उसे पूरी तरह संतुष्ट कर सके। राजमहल के रसोइए भी उसके लिए बिरयानी बनाते, लेकिन राजा को हमेशा उसमें कोई न कोई कमी नजर आती।
इसी बीच गांव में एक नया बिरयानी बेचने वाला आया। वह सिर्फ 10 रुपये में चिकन बिरयानी की प्लेट देता था। कीमत इतनी कम थी कि लोगों को विश्वास ही नहीं होता था। लेकिन बिरयानी का स्वाद इतना शानदार था कि उसकी दुकान पर रोज बड़ी भीड़ लगने लगी।
जब राजा के मंत्री को इस सस्ती और स्वादिष्ट बिरयानी के बारे में पता चला, तो उसे शक हुआ। उसने सोचा कि इतनी कम कीमत में इतनी अच्छी बिरयानी कैसे बेची जा सकती है। उसे डर था कि कहीं इसमें कोई गलत या नुकसानदायक चीज तो नहीं मिलाई जा रही।
भान सिंह ने खुद इस रहस्य को जानने का फैसला किया। वह आम आदमी का भेष बदलकर राजू की दुकान पर पहुंचा। बिरयानी खाते ही राजा हैरान रह गया। उसे लगा कि उसने इससे बेहतर बिरयानी कभी नहीं खाई थी।
राजा ने राजू से पूछा कि वह इतनी कम कीमत में स्वादिष्ट बिरयानी बेचकर नुकसान से कैसे बचता है। राजू ने जवाब दिया कि यह उसका पुश्तैनी कारोबार है और वह लोगों को खिलाकर उनका आशीर्वाद कमाना चाहता है।
राजा को बिरयानी का स्वाद पसंद आया, लेकिन उसने सावधानी बरतते हुए सैनिकों से राजू के ठिकाने की जांच भी करवाई। उन्हें कुछ संदिग्ध नहीं मिला। इसके बाद भान सिंह ने राजू को महल में बुलाया।
राजू को लगा कि शायद उसे गिरफ्तार किया जाने वाला है। उसने राजा से दया की गुहार लगाई। लेकिन राजा ने उसे सजा देने के बजाय महल का मुख्य शाही रसोइया बना दिया। अब उसका काम राजा के लिए वही खास बिरयानी बनाना था।
एक रात महल के बगीचे में राजू को काले शॉल में छिपे एक रहस्यमयी व्यक्ति से गुप्त रूप से मिलते देखा गया। दोनों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हुआ। यह साफ संकेत था कि राजू के पीछे कोई बड़ा राज छिपा हुआ था।
कुछ समय बाद राजा भान सिंह बिरयानी खा रहा था और उसने अपने मंत्री के सामने पड़ोसी राज्य कानपुर के खतरे की चर्चा की। उसने बताया कि कानपुर के राजा की सेना उनके राज्य से दोगुनी बड़ी है और हमला करने की तैयारी कर रही है।
राजा ने यह महत्वपूर्ण सैन्य जानकारी राजू के सामने ही बता दी। उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उसके सामने खड़ा रसोइया दुश्मन के लिए जासूसी कर रहा था।
उसी शाम राजू ने एक पत्र के जरिए राजा की महत्वपूर्ण सैन्य जानकारी काले शॉल वाले रहस्यमयी व्यक्ति तक पहुंचा दी। उसने उसे जल्द कार्रवाई करने के लिए कहा, इससे पहले कि किसी को इस साजिश का पता चलता।
अब राजा का भरोसा उसके लिए सबसे बड़ा हथियार बन चुका था। महल के अंदर मौजूद एक अजनबी को महत्वपूर्ण जानकारी मिल चुकी थी और राज्य पर खतरा लगातार बढ़ रहा था।
अगले दिन राजू ने पूरे शाही दरबार के लिए अपनी मशहूर 10 रुपये वाली चिकन बिरयानी की बड़ी दावत तैयार की। राजा और दरबारी खाना शुरू करने ही वाले थे कि अचानक मंत्री दौड़ता हुआ वहां पहुंचा और सबको रुकने का आदेश दिया।
मंत्री ने सैनिकों को राजू को गिरफ्तार करने के लिए कहा। उसने राजू के खाना पकाने वाले बर्तनों के पास छिपी एक छोटी पेटी बरामद की थी, जिसमें शक्तिशाली नशीली दवाएं थीं।
मंत्री ने राजू को आदेश दिया कि अगर बिरयानी में कुछ गलत नहीं है, तो वह सबसे पहले खुद उसे खाकर दिखाए। राजू डर गया और बिरयानी खाने की हिम्मत नहीं कर पाया। इससे उसका अपराध लगभग साबित हो गया।
राजा ने उसके स्वादिष्ट भोजन पर भरोसा किया और उसे महल में महत्वपूर्ण स्थान दे दिया। इसी भरोसे का फायदा उठाकर राजू ने राज्य की संवेदनशील सैन्य जानकारी दुश्मन तक पहुंचा दी।
राजू को सजा देने से पहले ही एक और बड़ा संकट सामने आ गया। कानपुर के राज्य ने अचानक महल पर भारी हमला कर दिया। शाही सेना पूरी तरह तैयार नहीं थी और दुश्मन ने अचानक धावा बोल दिया।
राज्य की सेना को भारी नुकसान हुआ। राजा भान सिंह ने बहादुरी से मुकाबला किया, लेकिन युद्ध में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई।
जब भान सिंह घायल होकर मृत्यु के करीब था, तभी मुकुल सिंह उसके सामने पहुंचा। अब उसके चेहरे पर कोई झूठी मुस्कान नहीं थी। उसने अपने भाई के सामने पूरी साजिश का सच खोल दिया।
मुकुल ने बताया कि वह अपने पिता के फैसले से बेहद नाराज था। उसने कानपुर के प्रतिद्वंद्वी राजा के साथ हाथ मिला लिया था। उसी योजना के तहत राजू को गांव में 10 रुपये की बिरयानी बेचने के लिए भेजा गया था।
मुकुल जानता था कि भान सिंह को बिरयानी बेहद पसंद है। उसे उम्मीद थी कि राजा राजू के स्वाद से प्रभावित होकर उसे महल में जरूर ले आएगा। इसके बाद राजू को शाही रसोई तक पहुंचाना और पूरे दरबार को निशाना बनाना आसान हो जाएगा।
भान सिंह को अपने भाई के विश्वासघात और अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने मुकुल को श्राप दिया कि धोखे से हासिल की गई राजगद्दी का सुख उसे कभी नहीं मिलेगा। इसके बाद भान सिंह की मृत्यु हो गई।
भान सिंह की मृत्यु के बाद मुकुल को लगा कि अब वह राजा बन जाएगा। वह अपनी जीत पर खुश होने लगा। लेकिन तभी कानपुर का राजा उसके सामने आ गया और मुकुल की मूर्खता पर हंसने लगा।
कानपुर के राजा ने बताया कि राजा प्रताप सिंह ने कभी उसके पिता की हत्या की थी। इसलिए यह हमला केवल सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए था।
मुकुल ने अपने ही भाई को मरवाने और अपने राज्य को भीतर से कमजोर करने में दुश्मन की मदद की थी। लेकिन उसके विश्वासघात के बदले कानपुर का राजा उसे राजगद्दी देने वाला नहीं था।
उसने सोचा था कि भाई को हटाकर वह राजा बन जाएगा, लेकिन दुश्मन के लिए रास्ता खोलकर उसने अपने ही राज्य को खत्म कर दिया। आखिरकार कानपुर के राजा ने मुकुल को अंधेरी कालकोठरी में डालने का आदेश दे दिया।
मुकुल को अंधेरी कालकोठरी में डाल दिया गया। वहां वह अपने किए हुए अपराधों और फैसलों पर पछताता रहा। उसकी लालच और बदले की भावना ने उससे उसका भाई, परिवार, सम्मान और अपना भविष्य सब छीन लिया था।
एक मात्र 10 रुपये की बिरयानी की प्लेट से शुरू हुई साजिश ने पूरे राज्य का भविष्य बदल दिया। मुकुल जिस राजगद्दी को पाने के लिए इतना बड़ा विश्वासघात कर बैठा, आखिरकार वह उसके हाथ भी नहीं आई।
उन्होंने भान सिंह को उसकी योग्यता, युद्ध कौशल और प्रजा के प्रति प्रेम के कारण राज्य के लिए बेहतर उत्तराधिकारी माना।
मुकुल को अपने पिता के उस फैसले से गहरी जलन थी, जिसमें भान सिंह को राजगद्दी दी गई थी।
राजू ने राजा को बताया था कि यह उसका पुश्तैनी कारोबार है और वह लोगों की सेवा करके उनका आशीर्वाद कमाना चाहता है।
राजा भान सिंह को राजू की बिरयानी बेहद पसंद आई, इसलिए जांच के बाद उसने राजू को मुख्य शाही रसोइया नियुक्त कर दिया।
राजू मुकुल सिंह और कानपुर के प्रतिद्वंद्वी राजा की साजिश का हिस्सा था और महत्वपूर्ण जानकारी दुश्मन तक पहुंचा रहा था।
कानपुर की अचानक हुई सैन्य कार्रवाई के दौरान भान सिंह गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में उसकी मृत्यु हो गई।
कानपुर के राजा ने उसे राजगद्दी देने के बजाय उसकी साजिश और विश्वासघात के कारण अंधेरी कालकोठरी में डालने का आदेश दिया।
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