जैसे को तैसा 😄 | Jaise Ko Taisa | Tit for Tat | Hindi Moral Story
क्या होता है जब कोई इंसान अपनी चालाकी और झूठ को अपनी सबसे बड़ी ताकत समझने लगे? और जब मुसीबत के समय उसे उन्हीं लोगों की जरूरत पड़े जिन्हें वह बार-बार धोखा देता रहा हो?
ToonShow Hindi brings you the entertaining animated Hindi Kahani "Jaise Ko Taisa", एक मजेदार और सीख देने वाली कहानी जिसमें चालाकी, झूठ, लालच और मुसीबत के बीच एक बड़ा सबक छिपा है।
खजूरा शहर में मंगत लाल अपनी चालाकी और ठगी के लिए मशहूर था। उसे लोगों से मुफ्त में चीजें लेना और अपनी बातों में फंसाकर उन्हें नुकसान पहुंचाना अच्छा लगता था।
एक दिन वह किराने की दुकान पर पहुंचा और दो किलो चीनी तथा चाय की पत्ती मांगने लगा। दुकानदार को पहले से ही शक था कि मंगत लाल बिना पैसे दिए सामान लेने की कोशिश करेगा।
मंगत ने चालाकी से कहा कि आज उसे तनख्वाह मिली है और वह सामान खरीदना चाहता है। यह सुनकर दुकानदार ने गोदाम से सामान निकालकर दे दिया।
सामान हाथ में आते ही मंगत ने कहा कि उसके पास अभी नकद पैसे नहीं हैं और वह अगले दिन एटीएम से पैसे निकालकर भुगतान कर देगा। यह कहकर वह सामान लेकर वहां से निकल गया।
आगे रास्ते में मंगत लाल की नजर एक मिठाई की दुकान पर पड़ी। वहां ताजी और गरम जलेबियां देखकर उसे अपने बेटे लड्डू की याद आई।
लेकिन मंगत जलेबी खरीदने के लिए पैसे खर्च नहीं करना चाहता था। उसने दुकान पर काम कर रहे नए कर्मचारी बिरजू को देखा और तुरंत एक नई कहानी बना ली।
मंगत ने परेशान होने का नाटक करते हुए कहा कि उसके दो हजार रुपये कहीं गिर गए हैं और आज उसके बेटे का जन्मदिन है। उसे अपने बेटे के लिए मिठाई ले जानी है लेकिन अब उसके पास पैसे नहीं हैं।
बिरजू नया था और मंगत की बातों पर विश्वास कर बैठा। उसने कहा कि मंगत अभी मिठाई ले जाए और अगले दिन पैसे दे दे।
मंगत ने तुरंत दो किलो जलेबी पैक करवाई और खुशी-खुशी वहां से निकल गया। बाद में दुकान के मालिक ने बिरजू को बताया कि मंगत लाल लोगों को ठगने के लिए जाना जाता है।
घर पहुंचकर मंगत ने जलेबियां अपने बेटे लड्डू को दे दीं। लड्डू खुशी-खुशी जलेबियां खाने लगा।
उसकी पत्नी शर्मिली सब समझ चुकी थी। उसने मंगत से कहा कि उसने निश्चित रूप से किसी को ठगा होगा और वह हमेशा दूसरों को बेवकूफ बनाकर सामान लाने की कोशिश करता है।
शर्मिली ने उसे चेतावनी दी कि अगर वह कभी सच में मुसीबत में फंस गया तो शायद कोई भी उसकी मदद करने के लिए तैयार नहीं होगा।
लेकिन मंगत ने उसकी बात को मजाक में उड़ा दिया और मुफ्त की जलेबियों का आनंद लेने लगा।
अगले दिन दो धर्मार्थ कार्यकर्ता एक स्थानीय गौशाला के लिए चंदा मांगने मंगत के घर पहुंचे।
मंगत ने कहा कि उसके पास पांच सौ रुपये का नोट है लेकिन उसके पास छुट्टे पैसे नहीं हैं। कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे छुट्टे दे सकते हैं।
मंगत ने पहले उनसे पांच सौ रुपये के छुट्टे ले लिए। तभी वहां से एक सब्जी वाला गुजरता हुआ दिखाई दिया।
मंगत ने तुरंत सब्जी वाले से सौ रुपये की सब्जियां खरीद लीं। जब भुगतान करने का समय आया तो उसने सब्जी वाले से कहा कि वह गौशाला में सौ रुपये दान कर दे और उसके बदले सब्जियों के पैसे वही मान लिए जाएं।
अपनी बातों के जाल में उसने दोनों पक्षों को उलझा दिया और बिना अपनी जेब से एक रुपया खर्च किए सब्जियां और पैसे दोनों अपने पास रख लिए।
दूर खड़ी शर्मिली यह सब देख रही थी और केवल सिर हिलाकर रह गई।
कुछ दिनों बाद मंगत लाल की जिंदगी अचानक बदल गई। उसका बेटा लड्डू स्कूल से घर वापस नहीं आया।
शर्मिली बहुत घबरा गई और मंगत के घर लौटने का इंतजार करने लगी। तभी मंगत का फोन बजा।
फोन पर एक बदमाश ने खुद को कालू बदमाश बताया और दावा किया कि उसने लड्डू का अपहरण कर लिया है।
उसने धमकी दी कि अगर मंगत अपने बेटे को जिंदा वापस चाहता है तो उसे दस लाख रुपये लेकर शहर के पीछे स्थित पुरानी हवेली में आना होगा।
यह सुनकर मंगत के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे पहली बार महसूस हुआ कि मुसीबत कितनी बड़ी है।
मंगत और शर्मिली ने घर की सारी बचत निकालकर देखी। उनके पास केवल छह लाख रुपये थे।
चार लाख रुपये अभी भी कम थे। शर्मिली ने मंगत से कहा कि उसे गांव वालों से मदद मांगनी चाहिए।
मंगत तुरंत गांव के मुखिया के पास पहुंचा और अपने बेटे के अपहरण की पूरी बात बताकर चार लाख रुपये उधार देने की विनती की।
लेकिन मुखिया ने उसकी बात सुनकर उल्टा उसका मजाक उड़ाया। उसे लगा कि मंगत आज फिर कोई नई कहानी बनाकर पैसे ठगने आया है।
मंगत एक घर से दूसरे घर गया। उसने हर किसी से मदद की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उसकी बात पर विश्वास नहीं किया।
वर्षों तक झूठ बोलने और लोगों को ठगने का परिणाम अब उसके सामने था। जब उसे सच में मदद की जरूरत थी, तब उसके पुराने व्यवहार के कारण कोई उसकी बात मानने को तैयार नहीं था।
निराश और टूट चुका मंगत वापस घर लौट आया।
शर्मिली ने अपनी जमा की हुई गहने मंगत को दे दिए ताकि उन्हें बेचकर बाकी पैसे जुटाए जा सकें।
मंगत ने गहने बेच दिए और किसी तरह दस लाख रुपये की रकम पूरी कर ली। उसने पैसे एक बैग में रखे और बेटे को बचाने के लिए पुरानी हवेली की ओर निकल पड़ा।
रास्ते में अचानक मिठाई की दुकान का कर्मचारी बिरजू उसे मिल गया। उसने मंगत को पकड़ लिया और जलेबियों के पैसे मांगने लगा।
मंगत ने उसे पैसे दिए और आगे बढ़ा। थोड़ी दूर जाने पर वही किराने वाला दुकानदार भी उसे मिल गया।
दुकानदार ने भी अपने सामान के पैसे मांगे। मंगत को मजबूरी में फिर अपने बैग से पैसे निकालकर भुगतान करना पड़ा।
एक-एक करके उसके पुराने व्यवहार का हिसाब उसके सामने आता गया। जिस तरह उसने दूसरों को उनके पैसे और सामान से वंचित किया था, उसी तरह अब उसकी अपनी जरूरत के पैसे रास्ते में कम होते जा रहे थे।
आखिरकार मंगत पुरानी हवेली में पहुंच गया। अंदर का माहौल डरावना था।
वहां उसने अपने बेटे लड्डू को देखा। हैरानी की बात यह थी कि लड्डू आराम से बैठकर खाना खा रहा था, जबकि अपहरणकर्ता उसके खाने की आदतों से परेशान दिखाई दे रहे थे।
कालू बदमाश ने मंगत से फिरौती के पैसे मांगे। मंगत ने अपना बैग उसके हाथ में दे दिया।
कालू ने पैसे गिने और तुरंत गुस्से में आ गया। रास्ते में दुकानदारों को भुगतान करने के कारण बैग में दस लाख रुपये नहीं बचे थे।
कालू ने मंगत पर उसे बेवकूफ बनाने का आरोप लगाया और अपने साथियों को दोनों को बांधने का आदेश दिया।
जैसे ही स्थिति गंभीर होने लगी, पुरानी हवेली के दरवाजे अचानक खुल गए। शर्मिली पुलिस और कुछ ग्रामीणों के साथ वहां पहुंच गई।
पुलिस ने कालू बदमाश और उसके साथियों को चारों ओर से घेर लिया। बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया गया और लड्डू को सुरक्षित उसके माता-पिता के पास पहुंचा दिया गया।
अपने बेटे को सुरक्षित देखकर मंगत की आंखों में आंसू आ गए। उसने लड्डू को गले से लगा लिया।
मुखिया ने मंगत से कहा कि वे केवल शर्मिली के समझाने पर उसकी मदद करने आए हैं। अगर फैसला केवल मंगत की पुरानी छवि के आधार पर किया जाता, तो शायद कोई उसकी बात पर विश्वास नहीं करता।
मंगत लाल को आखिरकार समझ आ गया कि लोगों को बार-बार धोखा देने का परिणाम कितना खतरनाक हो सकता है।
जिस दिन उसे अपने बेटे को बचाने के लिए गांव वालों की जरूरत पड़ी, उसी दिन उसकी पुरानी झूठी कहानियों ने उसके खिलाफ काम किया।
मंगत ने अपनी गलती स्वीकार की और वादा किया कि अब वह कभी किसी को धोखा नहीं देगा और न ही झूठ बोलकर अपना फायदा उठाएगा।
लड्डू सुरक्षित अपने घर लौट आया। मंगत ने अपनी पत्नी शर्मिली और गांव वालों के सामने अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी।
उसने समझ लिया कि चालाकी से कुछ समय के लिए फायदा जरूर मिल सकता है, लेकिन जब असली मुसीबत आती है तो लोगों का विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत बनता है।
उस दिन के बाद मंगत लाल ने दूसरों को ठगना और झूठ बोलना छोड़ दिया और ईमानदारी से जीवन जीने का फैसला किया।
1. झूठ और धोखा हमेशा नुकसान पहुंचाते हैं: दूसरों को ठगकर मिलने वाला फायदा अस्थायी होता है और अंत में परेशानी का कारण बन सकता है।
2. विश्वास बहुत कीमती है: एक बार लोगों का भरोसा टूट जाए तो सच्ची मुसीबत के समय मदद पाना मुश्किल हो जाता है।
3. जैसे को तैसा: इंसान जिस तरह दूसरों के साथ व्यवहार करता है, उसी तरह की परिस्थितियां कभी-कभी उसके सामने भी लौटकर आती हैं।
4. गलती स्वीकार करना जरूरी है: अपनी गलतियों को पहचानकर उन्हें सुधारने का फैसला ही बेहतर जीवन की शुरुआत है।
Jaise Ko Taisa is a Hindi animated moral story about Mangat Lal, a clever man who repeatedly tricks people until a serious family crisis teaches him the importance of honesty and trust.
People stopped trusting Mangat Lal because he had a long history of lying, conning others and taking goods without paying for them.
Laddu was kidnapped by Kallu Badmash and his gang, who demanded a large ransom from Mangat Lal. He was eventually rescued when Sharmili arrived with the police and villagers.
Mangat Lal learned his lesson when nobody initially believed his kidnapping story because of his dishonest reputation. He realized that his own actions had destroyed people's trust in him.
The story teaches that dishonesty and deception can create serious problems. Trust, honesty and good relationships are far more valuable than temporary gains from cheating others.
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